नवादा, रवीन्द्र नाथ भैया। बिहार की राजनीति में कई बार चुनाव सिर्फ वोटों का गणित नहीं होता, बल्कि रिश्तों, संगठन और राजनीतिक निष्ठा का परीक्षा बन जाता है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मौजूदा चुनाव इसी वजह से खासा दिलचस्प हो गया है।
एक तरफ जदयू ने लगातार तीन बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके वर्तमान विधान पार्षद और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार पर फिर भरोसा जताया है, तो दूसरी तरफ उन्हीं की पार्टी के विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज समर्थित प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में खुलकर समर्थन का ऐलान कर दिया है।दिलचस्प बात यह है कि जब नीरज कुमार से इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल हुआ तो उन्होंने टकराव की राजनीति को हवा देने के बजाय अपनी बात बेहद नपे-तुले अंदाज में रखी।
उनका कहना था—“नीतीश कुमार मेरे नेता हैं, एनडीए मेरी नीति है और मैं एक कार्यकर्ता के रूप में चुनाव लड़ रहा हूं।” यानी व्यक्तिगत बयानबाजी से दूरी और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संदेश।नीरज कुमार ने अपने चुनावी सफर का हवाला देते हुए कहा कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के जागरूक मतदाताओं का प्यार, दुलार और आशीर्वाद उन्हें लगातार तीन बार मिलता रहा है और उन्हें भरोसा है कि चौथी बार भी उनका समर्थन उन्हें, उनके नेता, उनकी पार्टी और गठबंधन के साथ रहेगा।
यहीं से इस चुनाव की असली तस्वीर सामने आती है। मुकाबला केवल नीरज कुमार बनाम अनुज सिंह नहीं रह गया है। जन सुराज ने 24 सितंबर को डॉ. अनुज सिंह को पटना स्नातक सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया, जबकि उन्हें जदयू विधायक अनंत सिंह का समर्थन पहले ही मिल चुका था।एक तरफ प्रशांत किशोर की जन सुराज अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में है, दूसरी तरफ नीरज कुमार के समर्थन में एनडीए के घटक दलों की सक्रियता दिखाई दे रही है।
भाजपा नेताओं के साथ-साथ एनडीए के अन्य घटक दलों के नेताओं की सक्रियता ने इस चुनाव को सामान्य विधान परिषद चुनाव से कहीं अधिक चर्चा में ला दिया है। भाजपा नेता सम्राट चौधरी के नीरज कुमार के पक्ष में खड़े होने की खबरें भी सामने आई हैं। नीरज कुमार की राजनीति की एक खासियत यह रही है कि वह संगठन और सदन दोनों में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके नीरज के सामने अब चौथी बार अपने पुराने जनाधार को कायम रखने की चुनौती है।
जदयू ने अनंत सिंह के विरोध के बावजूद उन्हें फिर टिकट दिया, जिसके बाद इस चुनाव का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया।
“नेता, नीति और नीरज”—नीरज कुमार के ताजा बयान को अगर इसी तीन शब्दों में समझा जाए तो तस्वीर काफी साफ दिखाई देती है। उन्होंने व्यक्तिगत विवाद पर प्रतिक्रिया देने के बजाय नीतीश कुमार को अपना नेता, एनडीए को अपनी राजनीतिक नीति और खुद को कार्यकर्ता बताया। यह बयान उस राजनीतिक संस्कृति की ओर भी इशारा करता है जिसमें पार्टी के भीतर मतभेद के बावजूद सार्वजनिक मंच पर संगठनात्मक अनुशासन की भाषा को प्राथमिकता दी जाती है।
लेकिन चुनाव मैदान में सवाल सिर्फ इतना नहीं होगा कि नीरज कुमार के साथ कौन खड़ा है। असली सवाल यह होगा कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह देखते हैं। तीन बार के अनुभव, संगठनात्मक समर्थन और लंबे राजनीतिक संपर्क के सामने जन सुराज का नया राजनीतिक प्रयोग और अनुज सिंह को मिला समर्थन किस तरह आकार लेता है—इसका जवाब चुनावी प्रक्रिया ही देगी।
फिलहाल इतना जरूर है कि पटना स्नातक की सीट बिहार की राजनीति का ऐसा अखाड़ा बन गई है, जहां एक ही पार्टी के भीतर से उठी अलग-अलग राजनीतिक धाराएं भी दिखाई दे रही हैं। नीरज कुमार ने विवाद में उतरने के बजाय अपने नेता, अपनी पार्टी और अपने गठबंधन का नाम लेकर अपनी लाइन स्पष्ट कर दी है।
अब निगाहें उन स्नातक मतदाताओं पर हैं, जिनके वोट से इस राजनीतिक कहानी का अगला अध्याय लिखा जाएगा।
