महिला किसान दिवस–2026 एवं अंतर्राष्ट्रीय वर्ष महिला किसान–2026 के अवसर पर महिला सशक्तीकरण, कृषि यंत्रीकरण, कौशल विकास को बढ़ावा देने पर जोर-
विजय कुमार सिन्हा
बीपी डेस्क। महिला किसानों को सम्मान, समान अवसर और कृषि विकास में उचित भागीदारी दिलाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उनके कौशल का विकास करने तथा उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। ये बातें माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने आज महिला किसान दिवस–2026 एवं अंतर्राष्ट्रीय वर्ष महिला किसान–2026 के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से आई महिला किसानों को संबोधित करते हुए कहीं।
मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। बीज की बुआई से लेकर रोपाई, निराई, कटाई और फसल प्रसंस्करण तक महिलाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके श्रम, अनुभव और भागीदारी के बिना कृषि विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए महिला किसानों को कृषि की मुख्यधारा में उचित स्थान देना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना आवश्यक है।
इस अवसर पर कृषि विभाग के प्रधान सचिव श्री नर्मदेश्वर लाल, विशेष सचिव श्री वीरेंद्र यादव, उद्यान निदेशक श्री अभिषेक कुमार, अपर सचिव श्रीमती कल्पना कुमारी सहित विभाग के अन्य वरीय पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में महिला किसान उपस्थित थीं।
महिला किसान मजबूत होंगी, तो परिवार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी
मंत्री ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में भी महिलाओं की भूमिका पुरुष किसानों के समान महत्वपूर्ण है। महिला किसान अपने परिश्रम से परिवार की आजीविका चलाने के साथ-साथ राज्य की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान देती हैं।
उन्होंने कहा कि महिला किसान दिवस केवल सम्मान देने का अवसर नहीं है, बल्कि उनकी समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए ठोस प्रयास करने का भी अवसर है। महिला किसानों को योजनाओं की जानकारी, प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि उपकरण और आर्थिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि जब महिला किसान आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो इसका लाभ पूरे परिवार को मिलता है। बच्चों की शिक्षा, परिवार के स्वास्थ्य और ग्रामीण समाज की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। हमारा प्रयास है कि महिला किसानों को कृषि विकास में बराबर की भागीदारी मिले और वे आत्मनिर्भर बनकर आगे बढ़ें।
आधुनिक कृषि तकनीक और छोटे कृषि यंत्रों से महिलाओं का काम होगा आसान
कृषि मंत्री ने कहा कि महिला किसानों के श्रम को कम करने और उनकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देना जरूरी है। रोपाई, निराई, कटाई और फसल प्रसंस्करण जैसे कार्यों में महिलाओं को काफी मेहनत करनी पड़ती है। उनकी जरूरतों के अनुरूप छोटे कृषि यंत्रों और आधुनिक तकनीकों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन, उद्यानिकी, कृषि प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अनेक अवसर हैं। महिला किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन देकर इन अवसरों से जोड़ा जा रहा है। मंत्री ने कहा कि महिलाएँ केवल कृषि कार्यों में योगदान देने तक सीमित न रहें, बल्कि कृषि उद्यमी के रूप में भी आगे बढ़ें। इसके लिए कौशल विकास, सरकारी योजनाओं की जानकारी और बाजार से जुड़ाव को मजबूत किया जाएगा।
प्राकृतिक खेती अपनाएँ, परिवार को स्वस्थ और मिट्टी को सुरक्षित बनाएँ
कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने महिला किसानों से अपने घर और गाँव से प्राकृतिक खेती एवं सुरक्षित भोजन की पहल शुरू करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि मिट्टी का स्वास्थ्य बनाए रखना, पर्यावरण की रक्षा करना और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना आज की बड़ी आवश्यकता है। रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अनुचित और अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति किसानों को जागरूक करना जरूरी है। गोबर से खाद तैयार करने और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने जैसे उपायों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिला किसान अपने परिवार के स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की महत्वपूर्ण संरक्षक हैं। मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि अपने घर से प्राकृतिक खेती और सुरक्षित भोजन की पहल शुरू करें। गोबर से खाद तैयार करें, मिट्टी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और लोगों को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अनुचित उपयोग से बचने के प्रति जागरूक करें। जब हमारी माताएँ और बहनें इस दिशा में आगे बढ़ेंगी, तो गाँव-गाँव में सकारात्मक बदलाव आएगा।
उन्होंने महिला किसानों से अपने प्रयासों को परिवार तक सीमित नहीं रखने, बल्कि गाँव की अन्य महिलाओं और किसानों को भी प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की पहल टिकाऊ कृषि और सुरक्षित पर्यावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
नारी शक्ति, प्रकृति और कृषि का संबंध हमारी संस्कृति की पहचान
कृषि मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति को विशेष स्थान दिया गया है। कृषि, प्रकृति और संस्कृति का आपस में गहरा संबंध है। खरीफ, रबी और ग्रीष्मकालीन फसलें हमारी अर्थव्यवस्था और जीवनशैली का महत्वपूर्ण आधार हैं।
उन्होंने कहा कि महिला किसानों का सम्मान, उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता और कृषि में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना समृद्ध एवं आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
