शराब तस्करों की गोलीबारी की कहानी पर सवाल, महिला दरोगा समेत चार पुलिसकर्मी हिरासत में; एसआईटी कर रही जांच
Biharsharif/ Avinash pandey: नालंदा जिले में उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत की मौत के मामले में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सिपाही की मौत शराब तस्करों की गोली से नहीं, बल्कि पीछा करने के दौरान साथी होमगार्ड जवान की राइफल से चली गोली लगने के कारण हुई। घटना के बाद शराब तस्करों की ओर से गोलीबारी किए जाने की कहानी सामने आई थी। हालांकि, पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ ही घटना की परिस्थितियों और टीम के सदस्यों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
महिला दरोगा समेत चार पुलिसकर्मी हिरासत में
मामले में छापेमारी टीम का नेतृत्व कर रही महिला दरोगा पुष्पा कुमारी समेत चार पुलिसकर्मियों को हिरासत में लिया गया है। गोली चलाने वाले होमगार्ड जवान सहित अन्य संबंधित कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।
उत्पाद अधीक्षक संजय कुमार चौधरी के अनुसार, छापेमारी अभियान की जानकारी न तो जिले के वरीय अधिकारियों को दी गई थी और न ही स्थानीय थाने को इसकी सूचना मिली थी। बताया जा रहा है कि पटना मुख्यालय से आई ईआईबी टीम में बिना किसी सक्षम पदाधिकारी के केवल दो सिपाही शामिल थे। वहीं, नालंदा में तैनात एक महिला दरोगा, तीन स्थानीय होमगार्ड जवान और दो बाहरी जवानों को लेकर दो वाहनों से शराब तस्करों का पीछा किया जा रहा था।
भागती गाड़ी रोकने के लिए की गई फायरिंग
प्रारंभिक जांच के अनुसार, शराब तस्करों की तेज रफ्तार से भाग रही गाड़ी को रोकने के लिए एक होमगार्ड जवान ने अपनी पारंपरिक राइफल से गोली चलाई। लेकिन गोली तस्करों के वाहन में लगने के बजाय आगे चल रही उत्पाद विभाग की दूसरी गाड़ी में जा लगी। इसी गोली से सिपाही अजीत गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि भागती गाड़ी को रोकने के लिए फायरिंग किन परिस्थितियों में की गई और क्या इस दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया गया था। भीड़भाड़ वाले क्षेत्र या चलती गाड़ी की दिशा में गोली चलाने जैसे मामलों में सुरक्षा संबंधी नियमों की अनदेखी की आशंका भी जांच के दायरे में है।
घटना के बाद गलत सूचना देने का आरोप
घटना गुरुवार रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है। गोली लगने के बाद घायल सिपाही अजीत को आनन-फानन में विम्स, पावापुरी ले जाया गया। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें पीएमसीएच रेफर कर दिया। आरोप है कि घटना के वास्तविक कारण को तत्काल उजागर नहीं किया गया। बताया जाता है कि घायल सिपाही को लेकर टीम के नालंदा जिले की सीमा से बाहर निकलने के बाद स्थानीय थाने को फोन कर सूचना दी गई कि शराब तस्करों की गोलीबारी में सिपाही घायल हुए हैं।
पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में प्रारंभिक पूछताछ और वैज्ञानिक अनुसंधान के बाद मामले की परतें खुलने लगीं। अब घटना के बाद दी गई सूचना और कथित तौर पर कहानी गढ़ने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
शराब तस्करी नेटवर्क की तलाश में झारखंड पहुंची टीम
शराब की खेप और उससे जुड़े नेटवर्क का पता लगाने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, शराब बिहार लाने में इस्तेमाल किए गए वाहन और कथित लाइनर की पहचान तथा गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम झारखंड रवाना हुई है।
वरीय अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि सक्षम पदाधिकारी की मौजूदगी और अनुमति के बिना छापेमारी अभियान किसके निर्देश पर चलाया गया था। पुलिसकर्मियों की भूमिका, फायरिंग की परिस्थितियों और घटना के बाद दी गई सूचना की सत्यता की जांच जारी है। मामले में जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
