एमजीसीयू का स्थायी कैंपस अब भी सपना: 61 एकड़ जमीन को बाढ़ग्रस्त बताने पर भड़के सांसद राधामोहन, शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र

मोतिहारी

मोतिहारी, राजन द्विवेदी। राष्ट्रपिता की कर्मभूमि चंपारण में एक दशक पहले शुरू हुए महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय का अपना स्थायी परिसर अब तक सपना ही है। कुलपति कार्यालय से लेकर क्लास तक किराए के भवनों में चल रहे हैं। इस बीच विवि को मिली 61 एकड़ जमीन को बाढ़ग्रस्त बताए जाने पर नया विवाद खड़ा हो गया है।

मामले पर सांसद राधामोहन सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने 11 अक्टूबर को केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। सांसद ने कहा कि पिछले दो साल में काफी जद्दोजहद के बाद 61 एकड़ जमीन मिली, कब्जा भी मिल गया और डीपीआर भी भेजा जा चुका है। इसके बाद इसे बाढ़ प्रभावित बताना भ्रामक और तथ्यहीन है।

सांसद के मुताबिक, उच्च शिक्षा सचिव ने बिहार सरकार को पत्र में जमीन को बाढ़ग्रस्त बताया है। जबकि अंचल के राजस्व अभिलेख और दशकों के बाढ़ मानचित्र इसकी पुष्टि नहीं करते। उन्होंने तर्क दिया कि बनकट-बैरिया और फुरसतपुर का यह इलाका ऊंचाई पर और NH के पास है। यहीं इंजीनियरिंग कॉलेज, BSF मुख्यालय और FCI के लाखों टन अनाज वाले गोदाम हैं। अगर यह बाढ़ क्षेत्र होता तो इतनी महत्वपूर्ण संस्थाएं यहां कैसे बनतीं?

गौरतलब है कि चंपारण के लंबे आंदोलन के बाद 2014 में केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत इसकी स्थापना हुई और 3 फरवरी 2016 से संचालन शुरू हुआ। लेकिन 10 साल बाद भी स्थायी कैंपस न बनना चंपारण की उपेक्षा को दर्शाता है। प्रति व्यक्ति आय में पूर्वी चंपारण 38 में 34वें स्थान पर है, ऐसे में यह विवि ही यहां शिक्षा, रोजगार और विकास की बड़ी उम्मीद है।